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Basant Panchami 2024: ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती माता की पूजन विधि

ज्ञान ही एक ऐसा शस्त्र है, जिससे व्यक्ति पूरी दुनिया में विजय पा सकता है। ज्ञान का प्रकाश पूरे संसार को अंधकार से रोशनी प्रदान करता है। जीवन के प्रत्येक मोड़ पर केवल ज्ञान की हमारा सहारा होता है, लेकिन इसका प्रकाश प्रत्येक व्यक्ति के जीवन पर नहीं पड़ता है, क्योंकि ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती माता हैं और केवल उन्हीं की कृपा से अज्ञानता का विनाश होता है और व्यक्ति का जीवन ज्ञान रूपी प्रकाश से भर जाता है। सरस्वती माता की कृपा के लिए किसी भी दिन भक्तियुक्त होकर उनकी उपासना कर सकते हैं, लेकिन माता की विशेष कृपा पाने के लिए बसन्त पंचमी के दिन उनकी उपासना करनी चाहिए। क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सरस्वती माता का आविर्भाव हुआ था। इस विशेष अवसर पर समस्त विद्यार्थी, शिक्षक एवं भक्तजन माता की पूजा अर्चना करते हैं और बौद्धिक विकास का आशीर्वाद माता से पाते हैं।  

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा क्यों की जाती है? 

माघ मास की शुक्ल पंचमी को बसंत ऋतु का आगमन हो जाता है, जिसे बसंत पंचमी के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती ब्रह्म देव की पुत्री हैं और इसी दिन ब्रह्म देव के मुख से मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था और यही कारण है कि बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती है। जिस प्रकार से धन व समृद्धि के लिए दिवाली के दिन माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, ठीक इसी प्रकार से ज्ञान व विद्या की प्राप्ति के लिए बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा की जाती है।  

बसंत पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त  

बसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है। इस वर्ष 2024 में यह तिथी 14 फरवरी 2024 को पड़ रही है और इस तिथि को पूजा के 3 शुभ मुहूर्त हैं- 

पहला – प्रात: 07:02 से 9:51 तक  

दूसरा - 11:16 से 12:41 तक 

तीसरा- 15:31 से 18:21 तक 

सरस्वती माता की पूजा का मंत्र 

ॐ सरस्वत्यै च विद्महे ब्रह्मपुत्र्यै च धीमहि । तन्नो देवी प्रचोदयात् ॥ 

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का महत्व  

सनातन संस्कृति में पीले रंग का विशेष महत्व होता है, क्योंकि पीले रंग को शुभता, समृद्धि और ऊर्जा को प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि विवाह से पूर्व वर वधु के लिए हरिद्र की रस्म का आयोजन किया जाता है, जिसमें दोनों के चेहरे और शरीर में पीली हल्दी लगाई जाती है। इसी प्रकार से बसंत पंचमी के दिन पीले एवं स्वेत वस्त्रों का महत्व है। इसका एक और पौराणिक महत्व यह कि सरस्वती माता को पीला और श्वेत रंग अत्यंत प्रिय है और वह उसी रंग के वस्त्र धारण करती हैं। 

सरस्वती पूजा का महत्व 

  • सरस्वती माता की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में तरक्की के मार्ग खुलते हैं एवं सफलता की प्राप्ति होती है। 
  • बौद्धिक शक्ति का विकास होता है एवं मानसिक विकार दूर होते हैं। 
  • शिक्षा, व्यापार, सरकारी नौकरी आदि में उन्नति के मार्ग खुलते हैं।  

बसंत पंचमी के दिन क्या करें 

  • इस दिन सर्वप्रथम प्रात: स्नान के बाद पीले या स्वेत वस्त्र धारण करने चाहिए।  
  • माता की पूजा के लिए स्वेत रंग सामग्री, जैसे कि पुष्प का उपयोग करें। 
  • सरस्वती पूजा के दिन यथाशक्ति के अनुसार गायत्री मंत्र का जप अवश्य करें।  
  • सरस्वती सूक्त का पाठ अवश्य करें।  
  • माता को पीले रंग की मिठाई या फिर खीर का भोग अवश्य ही लगाएं।  
  • सरस्वती माता की पूजा से व्यक्ति को बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है। 
  • आलस्य, दीर्घसूत्रता ,अरुचि आदि दुष्प्रवृत्तियों का विनाश होता है।
  • वैदिक एवं शास्त्रोक्त विधि से माता की उपासना करने पर व्यक्ति को ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।  

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