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8 बजे से पहले सूर्य देव को जल चढ़ाने के 10 लाभ एवं सही विधि

पृथ्वी में उपस्थित प्रत्येक जीव और प्राणी का सूर्य से एक घनिष्ठ संबंध होता है। सूर्य के तेज से हमें रोशनी दिखाई पड़ती है तथा उन्हीं के प्रकाश से हम, चंद्रमा की चांदनी और दीपक का प्रकाश देखने में समर्थ होते हैं। सूर्य की किरणों से ही पेड़ पौधे जीवित हैं और उनके जीवित होने के कारण प्रत्येक प्राणी श्वास ले पा रहा है। इतना ही नहीं, पृथ्वी का प्रकाट्य भी सूर्य के तेज से ही हुआ है। यदि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंचे, तो पूरा संसार रूक जाएगा चारों तरफ अंधकार छाने लगेगा और सृष्टि का विनाश हो जाएगा। पृथ्वी को प्रकाश प्रदान करने के लिए हमें सूर्य देव का आभार प्रकट करना चाहिए, क्योंकि वह नि:स्वार्थ भाव से बिना रुके युगों-युगों से प्रकृति के संतुलन के लिए प्रकाश तथा तेज प्रदान कर रहे हैं, जिसके कारण ही आज हम और आप इस संसार में जीवन यापन कर पा रहे हैं। उनका आभार प्रकट करने के लिए हमें केवल सूर्योदय के उपरांत उन्हें जल चढ़ाना चाहिए, जिसका उल्लेख शास्त्रों में भी मिलता है।   

सूर्य को अर्घ्य देने की सही विधि  

सूर्य देव को अर्घ्य देने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं, साथ ही यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है। सूर्य देव को प्रातः सही विधि द्वारा ही इस प्रकार से अर्घ्य देना चाहिए।  

  • प्रात: स्नान के पश्चात् अपने हाथों में जल लेकर सूर्यदेव की ओर मुख करके खड़े हो जाएं। 
  • खड़े होते हुए बाएं पैर को पूरा जमीन पर टिकाएं तथा दाहिने पैर के पंजे के बल पर खडे हों। 
  • जल को गायत्री मंत्र से अभिमंत्रित करके सूर्य देव को 3 बार अर्घ्य दें।  
  • अर्घ्य दान के द्वारा भगवान सूर्य की अर्चना के बाद उनकी स्तुति प्रार्थना की जाती है। 

भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस मंत्र द्वारा सूर्य देव को प्रणाम एवं प्रार्थना करनी चाहिए-  

ॐ अदृश्रमस्य केतवो विरश्मयो जनाँ २ 

अनु भ्राजन्तो अग्नयो यथा।  

उपयामगृहीतोऽसि सूर्याय त्वा भ्राजायैष ते योनिः सूर्याय त्वा भ्राजाय। 

सूर्य भ्राजिष्ठ भ्राजिष्ठस्त्वं देवेष्वसि भ्राजिष्ठोऽहम्मनुष्येषु भूयासम् ॥ (यजुर्वेद)  

हसः शुचिषद्धसुरन्तरिक्षसद्धोता वेदिषदतिथिर्दुरोणसत्। 

नृषद्धरसदृतसद्व्योमसदब्जा गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतं बृहत्। (यजुर्वेद) 

सूर्य देव को जल चढ़ाने के 10 लाभ 

सूर्य देव को जल चढ़ाने के कई लाभ है, जिससे व्यक्ति के जीवन में उदारता एवं संपन्नता आती है।  

1. भाग्योदय:- प्रात: सूर्योदय के उपरांत सूर्य देव का जल अर्पित करने से भाग्य का उदय होता है एवं जीवन में आ रही अड़चने दूर होती हैं।  

2. विवाह के योग:- नियमित रूप से प्रतिदिन सूर्यदेव को जल अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं एवं विवाह के योग बनते हैं।  

3. मान सम्मान:-  सूर्य देव को जल चढ़ाने के व्यक्ति के मान सम्मान में वृद्धि होती है तथा उसे समाज में एक प्रतिष्ठित पद प्राप्त होता है।  

4. शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि:- प्रतिदिन सूर्यदेव को जल अर्पित करने से शारीरिक ऊर्जा में सुधार होता है, क्योंकि सूर्य की किरणें शरीर में विटामिन डी की मात्रा को बढ़ाती हैं और ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।  

5. नेत्र दृष्टि में सुधार:- प्रात: सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए हम जल के द्वारा सूर्य की ओर देखते हैं और सूर्य की किरणें जल से होते हुए हमारे नेत्रों पर पड़ती हैं, जो हमारी दृष्टि के लिए लाभदायक है।  

6. निरोग:  आरोग्यं भास्करादिच्छेत् (मत्स्यपु०) अर्थात्,  सूर्य आराधना एवं मंत्रों के जप से जातक स्वस्थ रहता है तथा उसके शारीरिक रोगों का निवारण होता है। है। 

7. सूर्य दोष दूर: सूर्य देव को जल अर्पित करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है। इसके साथ ही व्यक्ति के कुण्डली से सूर्य दोष दूर होता है।  

8. सकारात्मकता का संचार:- प्रतिदिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से जीवन में सकारात्मकता का संचार बना रहता है और पूरा दिन शुभ बितता है।  

9. एकाग्रता:-  सूर्य देव को जल चढ़ाने से व्यक्ति के जीवन में एकाग्रता बनीं रहती है और व्यवसाय, कार्यालय, विद्यालय एवं प्रत्येक कार्य में एकाग्रता के साथ कार्य संपन्न होते हैं।  

10. रोग प्रतिरोधक क्षमता:- प्रात: सूर्य की किरणें स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होती है। यही किरणें शरीर से रोगों को उत्पन्न करने वाले रोगाणु को दूर करते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे जीवन से रोग दूर होते हैं। 

तो इस प्रकार से व्यक्ति के जीवन में सूर्य देव, प्रकाश के साथ-साथ सुख, समृद्धि, प्रतिष्ठा आदि का भी संचार करते हैं। यदि आप सूर्य देव से संबंधित अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो वैकुण्ठ आपकी सहायता कर सकता है।  

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